Thursday, January 30, 2025

अथ उद्यमिता अनुशासन 9


अध्याय  नौ 

दुख के कारण 

स्टार्टअप की यात्रा रहस्यमय यात्रा होती है। इस यात्रा में सफलता अनायास नहीं मिलती बल्कि अर्जित करना होतीं है। इंटरप्रेन्योर को मेहनत करनी पड़ती है तथा बहुत सारे लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है। जिससे प्रतिदिन तरह-तरह के विवाद होते रहते है। यदि सह संस्थापकों में क्लेश हैं तो सब दुःखी रहते हैं। दुःख एक नकारात्मक भाव की अवस्था है। दुःख अंधकार की तरह है यह कोई अस्तित्वगत बात नहीं है। और यदि सह संस्थापकों के मध्य दुःखों से लड़ना शुरू कर देते है तो और दुःख निर्मित कर लेते है। तो यहाँ बात है हमारे चयन की हम नकारात्मक प्रतिक्रिया चुनते हैं या सकारात्मक। जो इंटरप्रेन्योर नकारात्मक प्रतिक्रिया चुनते हैं वे आपस में लड़ने लगते है एक दूसरे पर दोषारोपण करने लगते है तो वहीं दूसरी ओर सकारात्मक इंटरप्रेन्योर दुःख के कारणों की खोज कर उन कारणों को दूर करने की कोशिश करता है। 

स्टार्टअप शुरू करना इंटरप्रेन्योर के लिए बड़े साहस का काम होता है। अधिकांश लोग स्टार्टअप शुरू करने के मार्ग पर आते ही नहीं है, केवल कुछ लोग शुरू करने की सोचते हैं और सोचते ही रहते है अवसर खो देते है, केवल विरले लोग शुरू कर पाते है और उन विरले लोगों में केवल चंद्र लोग सफल हो पाते है। तो अधिकांश लोगों को जीवन जो अवसर देता है वे उससे चूक जाते है। इंटरप्रेन्योर का जीवन सर्वाधिक असुरक्षित जीवन है इसमें सुरक्षा का कोई बीमा नहीं होता। ऐसे में अधिकांश लोग जीवन में सुरक्षा चुनने के कारण अपना कारोबार शुरू नहीं कर पाते। लेकिन वे जो भी काम चुनते हैं वहाँ भी दुखी ही रहते हैं और हमेशा अपनी परिस्थितियों के लिए दूसरों को दोष देते रहते हैं। जीवन का एक सिद्धांत है कि जो जितना जोखिम उठायेंगे उनके सफल होने के अवसर उतने अधिक होते है। उनकी अपनी कहानियाँ होतीं है वे अपने लिए एक संतुष्टि का जीवन जीने के साथ अन्य लोगों के लिए अवसर आधार तैयार करते है। 

हर महिला पुरुष के गहरे तलों पर ख़तरों के बीच जीने की अंतःप्रेरणा होती है। इसलिए प्रेरणा के वशीभूत हो कर लोग दूसरे के व्यवसाय में शेयर ख़रीदते हैं और जोखिम उठाते है। आज भारत में 11 करोड़ से ज़्यादा लोग शेयर बाज़ार में निवेश करते है। इनमें से अधिकांश लोग बार-बार नुक़सान उठाने के बावजूद बार बार निवेश करते है। इसलिए महर्षि पतंजलि कहते है किविवेक पूर्ण व्यक्ति जानता है कि हर चीज दुःख की ओर ले जाती है।बुद्ध द्वारा प्रतिपादित चार आर्य सत्यों में पहल सत्य है कि जीवन दुख है। इसलिए स्टार्टअप के संस्थापक के जीवन का एक मात्र आधार है आशा। इसलिए इंटरप्रेन्योर सफल होने की आशा के सहारे सारे दुख सह जाता है। चीन के इंटरप्रेन्योर जैक मॉ कहते है किकभी हार मत मानो, आज कठिन है, कल और भी कठिन होगा लेकिन परसों सुन्दर होगा।यथार्थ हमेशा कठोर होता है लेकिन भविष्य हमेशा सुन्दर होता है। दुख का कारण जानने के लिए उसका सामना करना होता है। यदि हम उससे बच कर निकल भागते हो तो हम कभी भी उन कारणों को नहीं जान सकते और कभी-कभी दुख की कल्पना उसका सामना करने से भयंकर होती है। आशा का तंत्र एक नशे की तरह काम करता है। इंटरप्रेन्योर की यात्रा में दुख एक राजमार्ग जैसा है, इंटरप्रेन्योर कहीं से भी यात्रा शुरू करें दुख ही जातें है। इंटरप्रेन्योर इससे बच नहीं सकता। तो यदि इंटरप्रेन्योर दुख का साक्षात्कार करता है तो वह पाता है कि वास्तव में वह इतना बड़ा भी नहीं है जितने की कल्पना की गई थी। 

समाज में दो तरह के लोग है एक वे जो समय ख़रीदते हैं और दूसरे वे जो समय बेचते हैं। तो इंटरप्रेन्योर समय ख़रीदने बाला है और नौकरी करने बाला समय बेचने बाला। तो क्या समय बेचने बाला दुखी नहीं है, बल्कि वह ज़्यादा दुखी है। तो इंटरप्रेन्योर को बदलना होता है। इस बात की परीक्षा तब होती है जब कठिन समय होता है, क्योंकि अच्छे समय में सभी बहादुर होते है। कठिन समय में ही सह संस्थापकों के बीच रिश्ते, भूमिकाएँ और पैसे से जुड़े संघर्ष, निवेशकों का रणनीति में हस्तक्षेप आदि की परीक्षा होती है। इन संघर्षों पर की बिज़नेस की सफलता या असफलता निर्भर करती है। यह बिज़नेस के जीवन चक्र को प्रभावित करता है। रिश्ते नष्ट हो जाते है, आर्थिक हानि होती है। हालाँकि मीडिया में स्टार्टअप के इस श्याह पक्ष को  कम करके दिखाया जाता है। केवल उजले पक्ष को उत्सव मनाया जाता है। तो इंटरप्रेन्योर का बिज़नेस रोमांटिक लव स्टोरी जैसा होकर शादीशुदा पति पत्नी के जीवन से भी जटिल होता है क्योंकि इंटरप्रेन्योर अपने जीवन साथी से ज़्यादा अपना समय स्टार्टअप में बिताते हैं। सबसे अच्छी टीम तब बनतीं है जब लोग एक दूसरे के कौशल कमियों के पूरक होते है। उनमें मत भेद हो सकते है लेकिन मन भेद नहीं होते है। 

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