Thursday, January 30, 2025

अथ उद्यमिता अनुशासन 10 [1]


अध्याय  दस

उद्यमिता की  शुरूआत 

दोस्तों ! अथ उद्यमिता अनुशासन के पिछले नौ अध्याय पड़ कर आप यह अंदाज़ा लगाने में सक्षम हो गये होंगे कि आप में वह गुण है या नहीं जो एक इंटरप्रेन्योर में स्टार्टअप शुरू करने के पूर्व होने आवश्यक है। शायद आपने सिंहासन बत्तीसी की कहानियाँ पड़ी या सुनी होगी जब उज्जैन के नये राजा ने पूर्व राजा विक्रमादित्य के सिंहासन पर बैठने की कोशिश कि तो सिंहासन के बत्तीस खम्बों से एक-एक कर एक-एक पुतली ने निकाल कर राजा को विक्रमादित्य के अलग-अलग गुणों का वर्णन कर उससे पूछा कि क्या आप में यह गुण है तो ही आप इस सिंहासन पर बैठने के अधिकारी हैं और राजा तब तक उस सिंहासन पर नहीं बैठा जब तक उसने अपने अंदर उन गुणों का विकास नहीं कर लिया। तो आप को भी इंटरप्रेन्योर की यात्रा जब तक शुरू नहीं करना चाहिए जब तक आपके अंदर इंटरप्रेन्योर बनने के शुरूआतीं  गुण हो। 

तो आईए जब आप अभी तक इसे पड़ना जारी रखे है तो आप ने इंटरप्रेन्योर बनने के सपने को पूरा करने का निश्चय कर लिया है। तो हम इस यात्रा के चरण दर चरण को समझना शुरू करते है पहला चरण - छोटी शुरूआत करे - जब भी कोई फ़र्स्ट टाईम इंटरप्रेन्योर अपने स्टार्टअप आइडिया के साथ मुझे मिलता है तो मैंने हमेशा पाया कि वह जिस सेक्टर में काम शुरू करना चाहता है तो वह उस सेक्टर में सब कुछ बदलने का इरादा ले कर चलता है। वह सोचता है कि अभी तक किसी भी व्यक्ति को इस तरह का यूनिक आइडिया नहीं आया है वह पहला व्यक्ति है। यह भावना वैसी ही है जैसे पहला प्यार होने पर भाव आता है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है बल्कि यह स्वभाविक है। हम ऐसे समाज में रहते हैं जिसमें बड़ा ज़्यादा होना स्वाभाविक रूप से बेहतर माना जाता है। लेकिन आपने एक कहावत सुनी होगीथिंकिं ग्लोबल एक्ट लोकलहमें बड़ी सोच रखना चाहिए पर शुरू आँत छोटे से ही करना चाहिए। हम सभी जानते है कि एक अच्छे विचार का कोई मौद्रिक मूल्य नहीं होता। बड़े विचार से बड़ी कम्पनी बनाई जा सकती है, बड़े बाज़ार पर क़ब्ज़ा किया जा सकता है बड़ी फ़ंडिंग उठाईं जा सकती है। लेकिन लोग शुरू कर फ़ंडिंग उठाने की तलाश में लग जाते है और फ़ंडिंग मिलने के कारण निर्माण, सृजन और नवाचार करने के अपने सपने को छोड़ देते है। आज यूनिकॉर्न स्टार्टअप की शुरू आत बहुत छोटे स्तर पर ही हुई थी चाहे वह जमेटो या फ़ेसबुक हो ये फ़ंडिंग के नोटों के पहाड़ पर शुरू नहीं हुई थी। जिन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को हम आज देखते है उन कम्पनियों की स्थापना बहुत साधारण परिवार से आने वाले लोगों द्वारा की गई थी। वॉल्ट डिज़्नी ने कहा था कियदि आप सपना देख सकते है तो इसे पूरा कर सकते है।योग की परंपरा मेंधारणाकी अवधारणा प्राचीन काल से है। सी क्रेट किताब में लॉ आफ अट्रेक्शन के विचार को बहुत लोकप्रिय बनाया। धीरूभाई अम्बानी द्वारा रिलायंस, कारसन भाई द्वारा निरमा, विजय शेखर शर्मा द्वारा पेटीएम, शिव नाडार द्वारा एचसीएल, नारायण मूर्ति द्वारा इन्फ़ोसिस, अनिल अग्रवाल द्वारा वेदांता किरण मजूमदार शॉ द्वारा बायकोन आदि कम्पनियों की शुरूआत बहुत छोटे स्तर से हुई थी। अच्छे विचार को छोड़ने की बजाय छोटे स्तर पर शुरू करना हमेशा सरल है। श्री सोहन लाल द्विवेदी जी की कविता हैकुछ किये बिना ही जयजयकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। 

No comments:

Post a Comment

Dear
Thanks for your comment, I will get back soon to you.