अध्याय दस
उद्यमिता की शुरूआत
दूसरा चरण हमारे मन में हमेशा ऊहापोह चलतीं रहतीं है कि उद्यमिता की शुरूआत करने के लिए कितना ज्ञान पर्याप्त है? इस बात का जबाब जानने के लिए हमें ऐसे लोगों के जीवन को देखना होगा जो हाल ही के वर्षों में सफल स्टार्टअप रहे है। स्टार्टअप को उनकी वैल्यूएशन के अनुसार सफलता के विभिन्न स्तर पर रखा जाता है तथा अलग-अलग नाम दिए जाते है जो इस तरह है-
मिनीकॉर्न स्टार्टअप
जिन स्टार्टअप का वैल्यूएशन 10 लाख डॉलर यानी 8.3 करोड़ रुपये से अधिक है उन्हें मिनीकॉर्न स्टार्टअप कहा जाता है. आमतौर पर शुरुआती दौर के सभी स्टार्टअप की वैल्यू इतनी ही होती है और इस क्लब के स्टार्टअप में शामिल होना बेहद आसान है.
सूनीकॉर्न स्टार्टअप
जिन स्टार्टअप की वैल्यूएशन 8.3 करोड़ से ज्यादा है और जल्द ही वह 10 लाख डॉलर यानी यूनिकॉर्न के स्तर पहुंचने वाले हैं, इस तरह के स्टार्टअप को सूनीकॉर्न स्टार्टअप स्टार्टअप कहते हैं. मौजूदा वक्त में भारत में कुल 50 ऐसे स्टार्टअप हैं जो यूनिकॉर्न स्टार्टअप बनने की रेस में शामिल है.
यूनिकॉर्न स्टार्टअप
आमतौर पर जब भी स्टार्टअप की बात होती है तो यूनिकॉर्न स्टार्टअप का नाम सबसे ज्यादा लिया जाता है. यह एक प्रकार का स्टार्टअप है जिसकी वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर यानी 8,319 करोड़ रुपये से अधिक है. साल 2013 में सबसे पहले इस शब्द का इस्तेमाल काउबॉय वेंचर के फाउंडर एलिन ली द्वारा किया गया था. भारत में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देशभर में यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या 108 है. वहीं साल 2025 तक इसकी संख्या 150 होने की संभावना है.
डेकाकॉर्न स्टार्टअप
जिन स्टार्टअप की वैल्यूएशन 10 अरब डॉलर से अधिक होती है उन्हें डेकाकॉर्न स्टार्टअप कहा जाता है. दुनिया में इस तरह के स्टार्टअप की संख्या बेहद कम है. क्रंचबेस यूनिकॉर्न बोर्ड के जनवरी 2023 के डाटा के अनुसार विश्व भर में केवल 47 ऐसे कंपनियां हैं जो डेककॉर्न स्टार्टअप की कैटेगरी में आती हैं.
हेक्टोकॉर्न स्टार्टअप
'होक्टो' एक ग्रीक शब्द है जिसका मतलब है सौ यानी जिन कंपनियों का वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर यानी 8.32 लाख करोड़ रुपये से अधिक है उन्हें हेक्टोकॉर्न स्टार्टअप कंपनी कहा जाता है. इसे 'सुपर यूनिकॉर्न' भी कहा जाता है. एलन मस्क की स्पेसएक्स अक्टूबर 2021 में हेक्टोकॉर्न स्टार्टअप की कैटेगरी में शामिल होने वाली पहली कंपनी बनी थी. इस कैटेगरी में गूगल, एप्पल जैसी कंपनियों का नाम भी शामिल है. भारत की कोई भी कंपनी इस कैटेगरी में शामिल नहीं है.
लिंक्डइन की तरफ से भारत के टॉप-20 स्टार्टअप की लिस्ट जारी की गई है, जो 2023 में तेजी से बढ़ रहे हैं. इस लिस्ट को चार पैमानों पर बनाया है गया है, जो रोजगार में ग्रोथ, एंगेजमेंट, जॉब इंट्रेस्ट और टॉप टैलेंट को अपनी ओर खींचने पर आधारित है. इस सूची में पहले स्थान पर है ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप ज़ेप्टो। इस के के सह-संस्थापक आदित पालिचा ने दुबई में जीईएमएस मॉडर्न एकेडमी से गणित और कंप्यूटर विज्ञान में आईबी डिप्लोमा के साथ स्नातक किया है। दूसरे स्थान पर है गुरुग्राम का स्टार्टअप ब्लू स्मार्ट। इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी और कंपनी में करीब 620 लोग काम करते हैं. यह कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल के जरिए दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में राइडिंग की सेवा मुहैया कराती है. कंपनी की फ्लीट में करीब 4500 इलेक्ट्रिक कारें हैं और इसी साल के अंत तक इसमें 10 हजार कारें शामिल करने की योजना है.ब्लूस्मार्ट के सह-संस्थापक पुनीत के गोयल ने एस्टन बिजनेस स्कूल से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एमएससी और एस्टन विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (डीबीए) में मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। तीसरे स्थान पर है डिट्टो इंश्योरेंस साल 2018 में शुरू हुआ बेंगलुरु के इस स्टार्टअप ने 250 से भी अधिक लोगों को रोजगार दिया है. यह इंश्योरटेक स्टार्टअप तमाम पॉलिसी के प्लान को तुलना करने और इसके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से इंश्योरेंस खरीदने की सुविधा देता है. पवन कुमार राय, डिट्टो इंश्योरेंस के सह-संस्थापक की शैक्षिक पृष्ठभूमि विविध है, जिसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं।
इसलिए यह कहना कि किस तरह का कितना ज्ञान स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए आवश्यक है बताना सम्भव नहीं है। अगर आपके पास कोई कारोबार का विचार है और वह विचार आपको सोने नहीं देता है तो स्टार्टअप की दुनिया में आपका स्वागत है। स्टीव जॉब्स अमेरिकी बिजनेस मैग्नेट और एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की अधिकृत स्व-शीर्षक जीवनी है। यह पुस्तक जॉब्स के अनुरोध पर वाल्टर इसाकसन द्वारा लिखी गई थी, जिसमें उन्होंने स्टीव जॉब्स के कुछ सफलता के फ़ॉर्मूले लिखे हैं। स्टीव जॉब्स कहते है कि “अगर आपका महान कार्य करने का सपना है तो एक ही तरीक़ा है जो भी काम करें उससे जी भर प्यार करे।” वह मानते थे कि सफलता एक रात में नहीं मिलती, हर कामयाबी के पीछे बहुत सारे दिनों की मेहनत होतीं है। वह कहते थे कि आप के पास समय कम है इसलिए इसे किसी और की ज़िंदगी जी कर बरबाद मत करो। “ स्टे हंगरी स्टे फुलिश” उनका प्रसिद्ध वाक्य है। वह हमेशा “थिंक डिफ़रेंट” पर ज़ोर देते थे। अमेरिका व चीन के बाद भारत स्टार्टअप का तीसरा सबसे बड़ा देश है। तो हमें कैसे पता चलेगा कि हम स्टार्टअप शुरू कर सकते है तो इसका एक ही जवाब है “आत्म विश्वास” यदि आप में आत्म विश्वास है तो आप कुछ भी कर सकते है। आप का जनून व सेल्फ़ मोटिवेशन ही अन्ततः आप को संघर्ष करते रहने के लिए प्रेरित करता है। धैर्य के साथ काम करते हुए जोखिम उठाने की क्षमता ही आप को उद्यमी बनातीं है। हमें असफलता कैलंडर से ऊपर उठकर काम करने की ज़रूरत होती है। काम के पास एक प्रेरणादायी कहानी होना चाहिए जिसकी दम पर आप एक अच्छी टीम बना पाते है, निवेशकों को आकर्षित कर सकते है व ऐसे ग्राहकों को आकर्षित कर सकते है जो पैसे दे कर आपके उत्पाद व सेवाओं को ख़रीदने को तैयार हो।
हमेशा लोग आप को सलाह देते है कि जिस तरह का आप स्टार्टअप करना चाहते है उस तरह की किसी कम्पनी में आप नौकरी कर अनुभव लेवे। लेकिन जब आप नौकरी करने लगते हैं तो जॉब छोड़ कर अपना काम शुरू करने के पूर्व पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के लिए वित्तीय समस्याओं का सामना करना होगा। कारोबार की बहुत समझ उसकी कठिनाइयों से भी परिचित करवातीं है तो कई बार कठिनाइयों को देखते हुए निर्णय लेना कठिन होता है। यहाँ सफलता का कोई नक़्शा नहीं होता, कोई फ़ार्मूला नहीं होता यह हर व्यक्ति की अलग-अलग यात्रा होती है क्योंकि हर व्यक्ति के लिए देश, काल व परिस्थितियाँ अलग-अलग होती है। हर व्यक्ति के लक्ष्य, सफलता की परिभाषा अलग-अलग होती है तो उन्हें उन का रास्ता व रणनीति का ख़ुद चुनाव करना चाहिए। दूसरों के अनुभव, ग़लतियाँ व सलाह सुन कर सीख सकते है पर निर्णय स्वयं ले। श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को पूरी गीता सुना कर कहा “ यथेच्छसि तथा कुरू” जैसी तेरी इच्छा हो वैसा तुम करो। तो यही वाक्य रह उद्यमी के लिए है कि कोई भी जोखिम न उठाना ही सबसे बड़ा जोखिम होता है।
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