Thursday, January 30, 2025

अथ उद्यमिता अनुशासन 7


अध्याय  सात

सफलता में बाधाएँ 

जब कोई इंटरप्रेन्योर स्टार्टअप शुरू करता है तो प्रारंभ में स्टार्टअप पूर्ण रूप से संस्थापक पर ही निर्भर करता है। लक्ष्य अभी बहुत दूर है और रास्ता लम्बा है। शुरू में संसाधन बहुत सीमित होते है और समस्याओं का अम्बार होता है। टीम नहीं होने से संस्थापक हमेशा अकेलापन महसूस करता है। इसलिए संस्थापक की स्थिति का प्रभाव संस्था पर बहुत अधिक होता है। महर्षि पतंजलि ने सफलता बाधाओं को चिन्हित किया है

  1. व्याधि- इंटरप्रेन्योर कई वारवर्क लाईफ़ बैलेंस कर पाने से उनकी शरीर की ऊर्जा की प्राकृतिक लय बिगड़ जाती है तब वे बीमार हो जाते है। अपने मनोभावों भावनाओं पर नियंत्रण रख पाने के कारण इसका प्रभाव काम पर पड़ता है।वर्क लाईफ़ बैलेंसपर इन्फ़ोसिस के संस्थापक श्री नारायण मूर्ति ने हाल ही में प्रति सप्ताह 70 घन्टा काम करने की बहस पर बोलते हुए कहा कि वेवर्क लाईफ़ बैलेंसमें विश्वास नहीं करते है और इस देश में हमें कड़ी मेहनत करने की ज़रूरत है। हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है। सोशल मीडिया पर यह बहस बहुत मज़ेदार हो गई है। जो लोग संस्थापक है वे श्री मूर्ति का समर्थन कर रहे है और जो कर्मचारी है वे पाँच दिन के सप्ताह की वकालत कर रहे है। लेकिन श्री गौतम अड़ानी श्री आनंद महेंद्रा जैसे कुछ लोगों का कहना है किवर्क लाईफ़ बैलेंसबहुत व्यक्तिपरक विषय है इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। यदि किसी को उनके किसी काम में आनंद आता है तोवर्क लाईफ़ बैलेंसहै। संतुलन व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर है। प्रश्न समय का नहीं है बल्कि व्यक्ति की उत्पादकता का है। जोनाथन फ़ील्ड ने उपने एक लिंकडिन पोस्ट में लिखा कि उनके एक स्पार्क पाँडकास्ट में स्नैप चैट के संस्थापक बेंजमिन से बात की, जो मानसिक स्वास्थ्य पर उद्यमिता के प्रभाव को उजागर करने के मिशन पर है, उन्होंने स्टार्टअप के संस्थापकों का डिजीटल सर्वे कर निष्कर्ष निकाले है कि 72% संस्थापक मानसिक स्वास्थ्य से जूझते है, 54% अपने बिज़नेस को लेकर बहुत तनाव में रहते है, 37% चिन्ता से पीड़ित है, 36% वर्नआउट का अनुभव करते हैं तथा 10% को पैनिक अटैक आते है। इन सब में सबसे भयानक बात यह है कि 81% संस्थापक अपने तनाव, भय और चुनौतियों को दूसरों से छिपाते हैं और आधे से अधिक अपने सह संस्थापकों से भी छुपाते है। लगभग 77% संस्थापक पेशेवर मदद लेने से इनकार करते है। युवा संस्थापक प्रौढ़ संस्थापकों की तुलना में मदद लेने को कलंक मानते हैं तथा महिला संस्थापकों की तुलना में पुरुष संस्थापक दोगुनी मात्रा में कलंक मानते हैं। 50% से अधिक संस्थापक कम्पनी की स्थापना के साथ नींद खो देते हैं तथा फ़ंडिंग के अनुपात में यह बीमारी बड़ती जाती है। 47% से अधिक संस्थापक कम्पनी की स्थापना के साथ कम व्यायाम करते है, अपने जीवन साथी के साथ 60% कम समय बिताते हैं। 58% अपने बच्चों के साथ कम समय बिताते हैं। 73% कम समय दोस्तों परिवार के सदस्यों के साथ बिताते हैं और अकेलेपन की भावना 10 में से 8 संस्थापकों में रहतीं है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इतने सारे दुखों के बावजूद 93% संस्थापक फिर से यह सब शुरू करना चाहते है। इसलिए सफल होने के लिए संस्थापक का स्वस्थ रहना आवश्यक है। 
  2. स्त्यान - धैय की कमी संकेत है कि इंटरप्रेन्योर की ऊर्जा बहुत निम्न तल पर है। महर्षि पतंजलि के समयप्राण ऊर्जाके सिद्धांत का जन्म हुआ। प्राण ऊर्जा या देह ऊर्जा मानव  शरीर में निरंतर घूमती रहती है। शरीर की ऊर्जा में गड़बड़ी होने पर धैर्य की कमी हो जाती है। इंटरप्रेन्योर बेचेन रहता है। इसलिए इंटरप्रेन्योर  की ऊर्जा हमेशा उच्च रहनीं चाहिए तभी वह संतुलित कोच विचार कर निर्णय ले सकता है, टीम को प्रोत्साहित कर सकता है तथा दैनिक समस्याओं का हल निकाल सकता है। निर्जीवता या निम्न ऊर्जा के कारण इंटरप्रेन्योर हमेशा केवल बड़ी बड़ी बातें भर करता है और कुछ करके नहीं दिखा पाता। निर्धारित लक्ष्यों से पिछड़ जाने के कारण नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करता है। ऐसे व्यक्ति ध्यान कर अपनी ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदल सकते है। 
  3. संशय - अनिर्णय की स्थिति में इंटरप्रेन्योर  अपने स्टार्टअप के विरूद्ध संदिग्ध हो जाता है। अपने भरोसे आस्था पर शंका होने पर सफलता पर प्रभाव पड़ता है। श्री कृष्ण ने गीता में कहा है- ‘अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति। नायं लोकोऽस्ति परो सुखं संशयात्मन: ||’ किन्तु जो अज्ञानी तथा श्रद्धाविहीन व्यक्ति शास्त्रों में संदेह करते हैं, वे भगवद्भावनामृत नहीं प्राप्त करते, अपितु नीचे गिर जाते है | संशयात्मा के लिए तो इस लोक में, ही परलोक में कोई सुख है | ऐसे इंटरप्रेन्योर निश्चिय युक्त नहीं होते है। यह करना है या नहीं निर्णय कर पाने के कारण विश्लेषण पक्षाघातएनालिसिस पेरालिसिसका शिकार हो जाते है। समय पर निर्णय होने के कारण यह लाख से चूक जाते है। इंटरप्रेन्योर को स्टार्टअप शुरू कर लेने के बाद संशय को सहयोग नहीं करना चाहिए। जब इंटरप्रेन्योर  संशय को सहयोग करता है तो वह अपनी चेतना की ऊर्जा देने लगता है तो अनिश्चितता बहुत बिगड़ती जाती है। तो यदि वह निर्णय नहीं ले पा रहा है तो वह काम कैसे कर सकता है। मनोवैज्ञानिक बैरी श्वार्टज़ ने अपनी किताब पैराडॉक्स ऑफ़ चॉइस: व्हाई मोरे इस लेस्समें लिखा है कि जब लोगों को अधिक विकल्प दिए जाने पर कभी-कभी वे कुछ भी नहीं चुना पाते है। इस अवस्था से बाहर आने के लिए बड़े लक्ष्यों को छोटे छोटे लक्ष्यों में विभाजित करना, कामों की प्राथमिकता सूची बनाना, टीम के सदस्यों की राय लेना चाहिए। अपनी सहज प्रतिक्रिया गट फ़ीलिंग को अति महत्व देना तथा यह मान कर चलना कि कोई सर्वोत्तम निर्णय नहीं होता, केवल सीखने के अवसर होते है। संशय कुत्ते की भाँति पीछे आता ही है यदि हम ध्यान दें तो समाप्त हो जाता है। 
  4. प्रमाद - असावधानी की अवस्था नींद में चलने जैसी होती है। इंटरप्रेन्योर अनेक वार अपने विचार से सम्मोहन ग्रस्त हो जाने पर सचेत नहीं रह पाता है। जैसे आज कल स्टार्टअप का टीवी, रेडियो, अख़बार, फ़िल्म सोशल मीडिया पर इतना रोमांटिक तरीक़े से प्रचारित किया जा रहा है कि रह कोई स्टार्टअप शुरू कर इंटरप्रेन्योर बनना चाहता है। ताकि वह अपनी प्रोफ़ाइल में सह संस्थापक या सीईओ लिख सके। यदि तुम इस सबसे सम्मोहित हो कर इंटरप्रेन्योर बन रहे हो तो हो सकता है कि तुम अपनी पड़ाई या कैरियर चौपट कर सकते हो। इसलिए आजकल हर 10 में से 9 स्टार्टअप तीन साल के अंदर बंद हो जाते है। यदि सम्मोहनवश स्टार्टअप शुरू कर दिया तो कुछ दिन बाद दिन प्रतिदिन की चुनौतियों के कारण काम करने में मन नहीं लगता है। क्योंकि कुछ भी करने का तुक समझ में नहीं आता है। यदि तुम लगे भी रहते हो तो कुछ प्राप्ति नहीं होती है। हृदय में आलस्य बैठ जाता है। आलस्य का अर्थ है कि तुमने जीवन के प्रति उत्साह खो दिया है। इंटरप्रेन्योर की उत्सुकता, ऊर्जा उत्साह बच्चों जैसी होना चाहिए। लेकिन इंटरप्रेन्योर के मन में बहुत सारे नकार, असफलताओं और हताशाओं की परतें जम जाने से प्रमाद बढ़ जाता है। जो असफलता को लाता है। 
  5. अविरति - विषयासक्ति इंटरप्रेन्योर में एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में सामने आती है। इंटरप्रेन्योरस् अनेक बार कई कारणों से फ़र्ज़ी अकाउंट बनाते है। फ़र्ज़ी ग्रोथ दिखाते हैं। अपनी जीवनशैली बहुत लक्ज़री आलीशान बनाने के लिए अनाप-शनाप खर्च करते है। फण्ड की हेराफेरी करते है। सहकर्मियों से ग़ैरक़ानूनी सम्बन्ध बनाते है और जाने कितनी तरह की व्यभिचार की कहानियाँ आये दिन मीडिया में रहतीं है। गूगल को-फाउंडर की पत्नी निकोल शनाहन की कहानी, जिसके मस्क से अफेयर की ख़बरें, गंभीर व्यक्तिगत दुर्व्यवहार के आरोपों में घिरने के बाद सीईओ के पद से इस्तीफा देने वाले फ्लिपकार्ट के सीईओ बिन्नी बंसल का विवाद, अशनीर ग्रोवर भारतपे के को-फाउंडर के बीच का विवाद,  हाउसिंग डॉट कॉम के सह-संस्थापक और सीईओ राहुल यादव को बोर्ड आफ डायरेक्टरों द्वारा निकाले जाने का मामला, चर्चित मामले है। वीवर्क का चाहे जो भी हस्र हुआ हो पर कंपनी पूर्व सीईओ और सह-संस्थापक एडम न्यूमैन की सम्पत्ति बड़ती रही। उबर में यौन उत्पीड़न समेत अन्य विवादों के जोर पकड़ने के बाद सह संस्थापक कलानिक को जून, 2017 में कंपनी के मुख्य कार्यकारी का पद छोड़ना पड़ा था। एडटेक प्लेटफॉर्म बायजू की वर्थ जीरो होने की बात कंपनी के फाउंडर बायजू रवींद्रन ने मानने की कहानी के बाद स्टार्टअप जगत में कारपोरेट गवर्ननेन्स से सरकारें इन्वेस्टर भी परेशान हैं। अविरति के कारण स्टार्टअप संस्थापक अपना, कम्पनी के कर्मचारियों कम्पनी का भविष्य संकट में डाल देते है।
  6. भ्रांतिदर्शन -मिथ्या ज्ञान के कारण कंपनी के फाउंडर अपने बिज़नेस आइडिया, रणनीति, बाज़ार के बारे में भ्रम पाल लेते है। भ्रम का अर्थ है खुलीं आँख का सपना। कंपनी के फाउंडर के इन भ्रमों के कारण अनेकों स्टार्टअप को अपूरणीय क्षति हुई है। अतः कंपनी के फाउंडर को भ्रांतिदर्शन से बचने की कोशिश करना चाहिए। विलवर्ग लेब पर फ़िल सेंटोरो ने 150 स्टार्टअप संस्थापकों से सर्वे के अनुसार निष्कर्ष निकाला कि 64% टेक संस्थापकों ने बताया कि उनकी कंपनी को संभावित व्यावसायिक विफलता का सामना करना पड़ा था। औसतन, टेक कंपनियों को व्यवसाय में लगभग 17 महीने बाद अपनी संभावित विफलता का सामना करना पड़ा। संभावित व्यावसायिक विफलताओं का सामना करने वाले 75% संस्थापकों ने स्वीकार किया कि उनकी कंपनी व्यवसाय में बने रहने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं थी।
  7. अपलब्धभूमितत्व - लक्ष्य से भटक जाना स्टार्टअप के संस्थापक के स्वभाव में जाता है। प्रतिदिन उसे नये नये आइडिया आते रहते हैं तथा बाज़ार में काम करने की सम्भावनाओं के कारण वह अपने लक्ष्य से भटक जाता है। टीम अपने लीडर का अनुसरण करती है लक्ष्य से भटके लीडर की टीम भी भटक जाती हैं। इसलिए स्टार्टअप में हमेशा प्रोडक्ट मार्केट फ़िट की अवधारणा पर ज़ोर देते है। 
  8.   अनवस्थिततत्वानि - प्रकृति को बनाए रखने की अक्षमता की स्थिति तब आती है जब स्टार्टअप संस्थापक अपनी इंटरप्रेन्योर की भावना को बचाय रखने में सक्षम नहीं रह जाता है। इंटरप्रेन्योर की भावना नई सोच, नई समस्या का नया समाधान ढूँढने की होती है। जो दूसरे के लिए समस्या होती है वह इंटरप्रेन्योर के लिए बिज़नेस ओप्पोरचोनिटी होतीं है। लेकिन जब वह अनवस्थिततत्वानि की अवस्था में जाता है तब वह यह मनोदशा बनाएँ रखने में विफल होने पर अपने स्टार्टअप की सफलता से दूर हो जाता है। 
  9. चित्तविक्षेप- चेतना में भटकाव उत्पन्न करने में रोग, उदासीनता, अनिर्णय, उपेक्षा, आलस्य, अपने स्वार्थ पर नियंत्रण रख पाना, भ्रम में देखना प्राप्त उपलब्धियों को सहेज पाने की अक्षमता प्राप्त प्रगति को बनाए रखने की विफलता के कारण चित्त में विक्षोभ बड़ जाते है जो सफलता को पाने की मुख्य रूकावटें हो जाती है। 

इसलिए स्टार्टअप के संस्थापक को इन की स्थिति को समझ कर निरंतर नियंत्रण की आवश्यकता होती है। 

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