अध्याय पाँच
एंटरप्रेन्योर को मन शांत रखने के साधन
उद्यमी को मनोविज्ञान की समझ होनी आवश्यक है। क्योंकि स्टार्टअप के जीवन में इतने ज़्यादा उतार-चढ़ाव होते है तथा इन्टर्नप्रोनर शुरू में अपने काम और जीवन में अंतर न रख पाने के कारण मन को प्रभावित होने से बचा नहीं पाता है। कभी-कभी किसी किसी इन्टर्नप्रोनर का मन पर नियंत्रण समाप्त हो जाने पर भयानक परिणाम होते है। वह चौबीसों घन्टा इसी विषय पर सोचता रहता है। श्री कृष्ण ने गीता में मनुष्य के नास होने की प्रक्रिया को समझाते हुए कहते है कि -
ध्यायतो विषयान्पुंस: सङ्गस्तेषूपजायते |
सङ्गात्सञ्जायते काम: कामात्क्रोधोऽभिजायते ||
क्रोधाद्भवति सम्मोह: सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम: |
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ||
विषयों का चिन्तन करने वाले मनुष्यों की उन विषयों में आसक्ति पैदा हो जाती है। आसक्ति से कामना पैदा होती है। कामना से क्रोध पैदा होता है। क्रोध होने पर सम्मोह (मूढ़भाव) हो जाता है। सम्मोह से स्मृति भ्रष्ट हो जाती है। स्मृति भ्रष्ट होने पर बुद्धि का नाश हो जाता है। बुद्धि का नाश होने पर मनुष्य का पतन हो जाता है। बायजू स्टार्टअप की कहानी इस प्रक्रिया का जीता जागता उदाहरण है। वर्ष 2007 में बायजू रबीन्द्रन ने ट्यूशन के काम में मिली सफलता से उत्साहित होकर वर्ष 2011 में थिंक एण्ड लर्न नाम से एक स्टार्टअप कम्पनी शुरू की तथा आन लाइन पढ़ाने के लिए बायजू का प्लेटफ़ार्म शुरू किया। यह प्रयोग बहुत सफल रहा तो वर्ष 2015 में बायजू का एप लाया गया। वर्ष 2020 में बायजू विश्व का सर्वाधिक मूल्यवान एडटेक स्टार्टअप बन गया। कम्पनी का वैल्यूशन रूपये 85,000 करोड़ हो गया। तब उन्होंने आकाश एजुकेशन सर्विस को रूपये 7,300 करोड़ में ख़रीदा, व्हाइट हेड जूनियर, टापर व आई रोबोट ट्यूटर कम्पनियाँ ख़रीद करने के लिए बिलियन डॉलर से अधिक का क़र्ज़ लिया। बायजू ने कभी ऑर्गेनिक ग्रोथ की नहीं सोची। एक समय कम्पनी की मासिक आय रूपये 30 करोड़ थी तथा खर्च रूपये 150 करोड़ था। ऐसे हालात में लोन चुकाने का बोझ बड़ता गया और कम्पनी का वैल्यूशन 22 विलियन डालर से घटाकर 5 विलियन डालर रह गया। इस वर्ष कम्पनी को रूपये 4,589 करोड़ का घाटा हुआ। इसके बाद कम्पनी के अकाउंट में गड़बड़ी सामने आने लगी। लोन देने वालों ने कोर्ट्स केश दायर कर दिया। कर्मचारियों की लगातार छँटनी की गई , अनेक देशों में काम बंद कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने कम्पनी में छापा मारकर केश दर्ज किया। बायजू रबीन्द्रन भारत से दुबई जा कर रहने लगे। उनकी स्वयं की वेल्थ रूपये 17,545 करोड़ से शून्य हो गई। आज कम्पनी पर देश व विदेश में अनेक कोर्ट्स में प्रकरण चल रहे है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा - “जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।” आदमी का केवल अकेले उसका चेतन मन ही नहीं है बल्कि उसके पास नौ गुना अचेतन मन भी है। इसलिए हमारी अनुभूतियाँ, विचार, व निर्णय अवचेतन मन से प्रभावित होते है।
मन को शांत रखने के लिए महर्षि पतंजलि ने ‘अभ्यासवैराग्याअभ्यांतन्निरोधः’ अभ्यास व वैराग्य के सतत अभ्यास से मन शांत रखा जा सकता है। इसलिए स्टार्टअप के संस्थापक को स्वयं व स्टार्टअप को अलग समझने के लिए अभ्यास करना चाहिए। जिससे उनकी अशक्ति कम हो जाती है और वैराग्य भाव बड़ने से कम्पनी अधिक कुशलता से चला सकते है। वैराग्य का आय आलसी पन नहीं है बल्कि इसका मतलब है अनासक्ति। स्टार्टअप से अनासक्ति का भाव अवचेतन व अचेतन तक ले जाने के लिए सतत अभ्यास की आवश्यकता है। इस बात की बुद्धि गत समझ काम नहीं आती है। हर स्टार्टअप शुरू करने वाला यह अच्छे से समझता है कि स्टार्टअप उससे है वह स्टार्टअप नहीं है। लेकिन जब कम्पनी में गड़बड़ होती है तो यह समझ ग़ायब हो जाती है। उस का दिमाग़ हमेशा सोचता रहता है, नींद नहीं आती, खाना नहीं पचता, ब्लड प्रेशर बड़ जाता है, व हार्मोन की गड़बड़ी होने से धीरे-धीरे वह अवसाद में चला जाता है। क्योंकि अनासक्ति चेतन मन के तल पर तो समझ रहा है लेकिन अवचेतन व अचेतन मन के तल पर यह समझ नहीं होतीं है। कोई विचार अचेतन का हिस्सा तभी बनता है जब वह निरंतर दुहराया गया हो। जैसे आप का नाम। यदि आप किसी भीड़ बाली जगह में कितनी गहरी नींद में सो रहे हो और कोई आप का नाम पुकारे तो आप जाग जाते है, जबकि दूसरे गहरी नींद में सो रहे होते है। इसी तरह तुम्हारी मात्रभाषा है। इसलिए सैनिक, व खिलाड़ी निरंतर अभ्यास करते है। जब हम तैरना, साइकिल चलाना या गाड़ी चलाना सीख लेते है तो फिर मशल मेमोरी से ही कर पाते है। कम्पनियाँ लगातार विज्ञापन दिखातीं है। क्योंकि विज्ञापन से वह प्रोडक्ट आपके अचेतन का हिस्सा बन जाता है और जब आप माल में ख़रीदारी करने जाते है तो आप वहीं प्रोडक्ट उठा कर लाते है। क्योंकि जब कोई याददाश्त बन जाती है तो उसे नष्ट नहीं किया जा सकता है। इसलिए योग परंपरा में अभ्यास पर इतना ज़ोर दिया गया है। मन को शांत रखने के लिए स्टार्टअप संस्थापक को स्वस्थ व सफल होने के लिए यह अभ्यास आवश्यक है।
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