अध्याय चार
कौन सा उधम कैसे किया जाए?
बहुत सारे युवा आज अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते है। लेकिन अधिकांश लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें करना क्या है? या कई लोगों के मन में बहुत अस्पष्ट विचार होता है। किसी भी स्टार्टअप का जन्म विचार से ही होता है। तो हमें अपने स्टार्टअप को भी अपना मानस पुत्र ही मानना चाहिए। ब्रम्हाण्ड की रचना का विचार सबसे पहले ब्रह्मा जी के मन में ही आने की कथा है। महात्मा बुद्ध ने कहा है कि मन सभी वृत्तियों का पुरोगामी है। इसलिए हमें मन की वृत्तियों की समझ होनी चाहिए। आधुनिक मनोविज्ञान आज यह सब समझने का प्रयास कर रहा है। लेकिन महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र में मन को चार आयामों को माना है- मन, बुद्धि, चित्त व अहंकार। किसी भी विचार की अनुभूति सबसे पहले चित्त में होती है। जिसे महर्षि पतंजलि ने चित्त वृत्ति कहा है। चित्त की पाँच वृत्तियों का उल्लेख है- प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा व स्मृति। तो स्टार्टअप के संस्थापक को यह समझना चाहिए कि स्टार्टअप का विचार किस भाव दशा में कौनसी वृत्ति से आया है।
तो उद्यमी को यह समझना चाहिए कि उद्यम हो जो विचार उनके मन में आप है वह किस वृति व कोन सी भावदशा में आया है।हर उद्यम की शुरुआत एक आइडिया या विचार से होती है। जो लोग अपना स्टार्टअप शुरु करना चाहते है उन्हें सभी लोग उनके आईडिया के बारे में पूछते है। सामान्यतः, जो दूसरे की समस्या होती है वह उद्यमी के लिए बिजनिस करने का अवसर या आइडिया होता है ।यह समस्या स्वयं की, परिवार की या समाज की हो सकती है। जो व्यक्ति जितना संवेदनशील, चेतनावान होता है वह अपने आस-पास की समस्याओं को आसानी से महसूस कर पाता है। सामान्यतः लोग, समस्या को देख कर अनदेखा करते है और सोचते है कि इस समस्या का समाधान खोजना उनका काम नही है। इस समस्या का समाधान या तो सरकार को खोजना चाहिए या किसी अन्य व्यक्ति को। ऐसे दृष्टिकोण वाले व्यक्ति उद्यमी होने की श्रेणी में नही आते है। उद्यमी होने के लिए पहली शर्त है कि जब भी वह जहां भी कोई छोटी से छोटी समस्या को देखे तो उसका समाधान खोज कर क्रियान्वित करने की सोचें । वही सच्चा उद्यमी स्वभाव का व्यक्ति है। यह व्यक्ति रजोगुण प्रधान होता है। आज जो बड़े व्यावसाय खड़े हुए है वह इसी तरह के लोगॊं द्वारा खड़े किए गए हैं। क़रीब एक दशक पहले सैन फ्रांसिस्को में किराय के घर में रहने वाले ब्रायन चेस्की , जो गेब्बिया व नाथन ब्लेचारज़िक अपने घर का किराया नहीं दे पा रहे थे व खुद खर्च के लिए पैसा नहीं होता था। तब उन्हें अपने एयर मैड्रेस किराये पर दे कर अपना खर्च निकालने का विचार आया और इसी विचार ने 30 बिलियन डालर की कंपनी बना दी। जिसका नाम एयर बी एन बी है। इस छोटे से विचार से उत्पन्न कम्पनी आज 220 देशों में काम करती है।कोरोना काल में जब लोगॊं के कारोबार डूब रहे थे और धंघे चौपट हो रहे थे, तब कैवल्य वोहरा व आदित पलीचा को खाना, किराना व अन्य जरूरी सामान लोगो के घरॊं में 10 मिनिट में पहुँचने का विचार आया। इसी विचार से जेप्टो कम्पनी की शुरुआत हुई जो आज 140 करोड डालर के वैल्यूएशन वाली कंपनी बन गई है। इस विचार के कारण ही भारत मैं क्विक कॉमर्स कम्पनियों का जन्म हुआ। इसी तरह नौकरी डॉट काम की शुरुआत जीव बिखचंदानी ने की जिसके बाद हमारे देश में स्टार्टअप कल्ट की शुरुआत हुई। फणींद्र शर्मा व उनके दोस्तों ने बस के टिकिट ऑनलाइन बेचने के विचार पर रेडबस डाँट कॉम की शुरुआत की। इसी तरह आर्देशिर गोदरेज को वर्ष 1897 में मुम्बई में चोरियां बड़ने की खबर आखबर में पड़ कर ताला बनानें का विचार आया तब उन्होंने एक छोटी सी जगह में ताल बनाने की गोदरेज कम्पनी की शुरुआत की जो आज 50 देशों में व्यापार कर रही है तथा जिसका बाज़ार मूल्य रूपये 1.5 लाख करोड है। ऐसी कहानियां आज हर कम्पनी के बारे में उपलब्ध है जिन्हे जानकार आपको लगेगा कि केवल एक व्यक्ति की समस्या से भी बहुत बड़ा उद्यम खड़ा हो सकता है। अकेले भारत मे आज 1,40,803 स्टार्टअप पंजीकृत है। जिन्होंने 15.53 लाख नौकरियां सृज़ित की है।अब यह प्रश्न है आप कैसे जाने कि कौन सा विचार आप के लिए सही है, जिस पर कम कर आप अपना कारोबार प्रारंभ कर सकते है। तो इसका सीधा सरल जवाब है कि आप अपने विचार से जिस समस्या का समाधान करना चाहते है तो उसके लिए क्या लोग भूग़तान करने को तैयार है? यदि हाँ तो आप सही रास्ते पर है और आप का विचार “बहुत अच्छा” है। इसके लिए आप अपनी पढ़ाई व नौकरी छोड़ कर अपनी बचत का निवेश कर सकते है। लेकिन इस विचार को उद्यम में बदलने के लिए निम्न क़दम उठाना आवश्यक हैं:-
- पहला कदम - वास्तविक समस्या की पहचान - जब आप अपनी स्वयं के “भोगा हुआ यथार्थ” के समाधान के लिए कोई विचार विकसित करते है तो वह समस्या वास्तविक समस्या ही होती है।आप दिन में स्वप्न नहीं देख रहे होते है। ऐसे अनेक उदाहरण है जैसे मेलिना पर्किन्स ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी में पार्ट टाइम पढ़ाने का काम करती थी उन्हें बच्चों को “डिज़ाइन सॉफ्टवेयर सिखाना” था। उस समय उपलब्ध सॉफ्टवेयर बहुत महँगे तथा जटिल थे। तब उनके मन में एक विचार आया कि क्या एक ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया जाना चाहिए जो किसी भी बिना डिज़ाइन सीखे व्यक्ति को डिज़ाइन बनाना सिखा सके।इसी विचार से कैनवा एप का जन्म हुआ। जिसका आज सभी लोग आसानी से उपयोग करते है। लेकिन ऐसे बहुत उद्यम है जो पर्यात फण्डिंग होने के बावजूद भी असफल हो गये। इनमें वायजू, फूड पान्डा, फ्रीचार्ज, दूधवाला व डील शेयर आदि है। आई बी एम के एक अध्यापन के अनुसार भारत में शुरू होने वाले स्टार्टअप में से 90% विफल हो जाते है। विफलता की दर फिनटेक में 75%, प्रौद्योगिकी में 63%, रियल स्टेट में 48% व निर्माण में 20% है। अमेरिका के एक इन्वेस्टर विल ग्रोस ने अपने टेड टॉक में स्टार्टअप की सफलता सही समय पर 42%, टीम व कियान्वयन पर 32% आइडिया पर 28% बिज़नस मॉडल्स पर 24% तथा फडिंग पर 14% निर्भर होती है।
- दूसरा कदम- अपने लक्षित ग्राहकों को परिभाषित करना - यदि आपके पास एक “बहुत अच्छा” विचार है तो दूसरा चरण यह है कि आप अपने लक्षित ग्राहकों की पहचान करें। जब उद्यमी किसी विचार से प्यार करने लगता है तो उसे लगता कि हर कोई आप के उत्पाद या सेवा खरीदना चाहेगा। लेकिन यह सच नहीं होता है। जैसे भारत में कोई उद्यम जब शुरु करता है या कोई बहुराष्ट्रीय कम्पनी अपने उत्पाद बेचना चाहते है तो सामान्यत: लोग भारत की एक सौ व्यालीस करोड़ जनसंख्या को अपना उपभोक्ता बताते है। जब कि यह सत्य नही होता है। कोई आपका उत्पाद या सेवा तभी ख़रीदेगा जब वह उस की किसी ज़रूरत या समस्या की पूर्ति करती है। दूसरे उस की क्रय शक्ति आप का मूल चुनाने की हो। तीसरे वह उसके पहुँच में समीप उपलब्ध हो तथा उनकी धार्मिक व सामजिक मान्यताओं के विपरीत न हों। जैसे पॊपुल रिसर्च ऑन इंडियाज़ कंज्यूमर के अनुसार वर्ष 2004-2005 में जहां 30% परिवार गरीब थे वे 2030 तक केवल 6%रहेंगे। मध्यम वर्ग 2004-2005 में 14%. आबादी थी जो 2030 तक 46% हो जायेगी। अमीरों की आय रूपये 30 लाख वार्षिक, मध्यम वर्ग की आय रूपये 5.30 लाख वार्षिक निम्न वर्ग की आय रूपये 1.25 लाख से 5 लाख वार्षिक व गरीब की आय रूपये 1.25 लाख वार्षिक से कम आकलित की गई है। इन आँकड़ों के आधार पर आप के मूल्य पर कितने प्रतिशत लोग आप के उत्पाद या सेवाओं को क्रय कर सकेंगे वह आँकड़ा आप के लक्षित वर्ग का हो सकता है। इस पर अन्य कारकों के प्रभाव का आकलन कर आपके “कुल बाज़ार” के आकार की गणना की जाना चाहिए।
- तीसरा कदम- प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण करना- यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि उसका कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है तो यह ग़लत मान्यता है। यदि कोई समस्या है तो कोई किसी न किसी तरह का समाधान उपलब्ध करवा रहा होगा। तो आप अपने प्रतिस्पर्धी की नक़ल कर सफल नहीं हों सकते। आप को समस्या के मौजूदा सभी समाधान उपलब्ध करवाने वाली कम्पनियों के बिज़नेस माडलों को समझना होगा और अंतरालों गैप को पहचान कर बेहतर समाधान उपलब्ध कराने की कोशिश करना चाहिए। यदि आप किसी दूसरे देश या किसी अन्य सेक्टर के आईडिया की नक़ल कर सफल नहीं हो सकते। जैसे कृषि क्षेत्र में कृषि आदान सप्लाई चैन को समझें बिना जिन्होंने एग्रोटेक फ़िलिप कार्ट या अमेजन कम्पनियों की नक़ल का स्टार्टअप शुरू किए थे वे आज या बन्द हो गए या बहुत अधिक घाटा उठा कर चल रहें है उन्होंने अधिकांश प्रदेशों में कारोबार बंद कर दिए हैं तथा अनेक वर्टिकल्स बंद कर कर्मचारियों की छटनी कर दी है। क्योंकि इन लोगों को लगा कि वह फ़ीडिंग की दम कर कम क़ीमत पर माल बेच कर पूर्व की सप्लाई चैन को तोड़ देंगे। लेकिन वे करोड़ों करोड़ रुपए बर्बाद करने के बाद भी सफल नहीं हो सके। क्योंकि जितना मार्जिन इलेक्ट्रॉनिक, फ़ैशन, व सौंदर्य प्रसाधन के सामान बेचने में जो मार्जिन है उसना मार्जिन कृषि आदान के उत्पादों में नहीं है। कृषि उत्पादक बेचने के मण्डियों के विकल्प के तौर पर विकसित ई-कॉमर्स ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म सफल नहीं हो पा रहे है। क्योंकि हमारे देश के 85% किसान लघु व सीमांत श्रेणी के है वे बहुत कम मात्रा में कृषि आदान क्रय करते है व उनका उत्पाद भी बहुत कम मात्रा में होता है तथा उसकी गुणवत्ता भी अलग-अलग होती है। इन कारणों के कारण आज तक कोई भी एग्रीटेक स्टार्टअप सही विकल्प प्रस्तुत करने में सफल नहीं हो सका है।
- चौथा कदम- बाज़ार में अवसरों की तलाश- जब आप अपने लक्षित ग्राहकों के आधार पर बाज़ार के आकार का आकलन कर लेते है तब आपको यह समझना होगा कि इस लक्षित बाज़ार के कितने प्रतिशत लोगों को आप आकर्षित कर सकते है और अपने व सेवाओं को बेच सकते है। इसके लिए उपभोक्ताओं के व्यवहार को समझना चाहिए। अर्ली एडेप्टर उपभोक्ताओं की पहचान कर शुरू में उन्हें टार्गेट किया जाना चाहिए फिर फ़ॉलोअर उपभोक्ताओं को। अपने बिज़नेस माडल में बदलाव के लिए शुरू से ही आँकड़ों का विश्लेषण कर स्टार्टअप की स्थिरता बड़ा कर लाभ को बड़ा सकते है।
- पाँचवा कदम- प्रोडक्ट मार्केट फ़िट की तलाश - प्रारंभ से ही बहुत बड़ी लागत लगा कर काम शुरू करने के स्थान पर आईडिया को छोटे स्तर पर टेस्ट कर प्रोडक्ट मार्केट फ़िट की तलाश करनी चाहिए। ग्राहकों की संख्या विस्तार करना एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। ग्राहकों के दर्द के बिन्दुओं को समझने के लिए प्रारंभिक ग्राहकों का फ़ीडबैक लेना चाहिए। कोविड के समय एडटेक स्टार्टअप व ई-कॉमर्स स्टार्टअप ने बहुत निवेश उठा कर बहुत व्यापक स्तर पर काम शुरू किया। उन्हें उम्मीद थी कि वे ग्राहकों की आदतों को बदल में सफल होंगे। लेकिन लाँक डाउन ख़त्म होने पर ग्राहक अपनी पुरानी आदत के अनुसार आफलाइन चले गये। प्रोडक्ट मार्केट फ़िट को सस्ते में बेच कर नहीं परखा जा सकता है।
- छटवॉ क़दम- परिवर्तन, परिवर्धन व पुनरावृत्ति - आज डिजिटल युग में मार्केट ईनटेलीजेनस व ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आँकड़ों को एकत्र करना, विश्लेषण करना व आगे के अनुमान लगाने के लिए बहुत सारे टूल्स उपलब्ध है। इसलिए स्टार्टअप को शुरू से ही अपनी ताक़त और अवसरों को पहचानें, कमज़ोरियों व जोखिमों को कम करने के लिए आँकड़ों पर नज़र रखने के साथ साथ अपने प्रतिद्वंद्वी की रणनीति व नई टेक्नोलॉजी को अपनाने के लि स्टार्टअप को बहुत लचीलापन अपनाने की कोशिश करना चाहिए। बाज़ार में क्या चलेगा क्या नहीं, परीक्षण व तुष्टियों को खोजने की प्रवृत्ति आप की सफलता की सम्भावना को बढ़ा देती है।
स्टार्टअप हमेशा से अनिश्चितता से भरा होता है। जिसमें निरंतर ऊपर-नीचे जाने का खेल चलता रहता है। प्रतिदिन नई चुनौतियों का सामना करना, टीम को उत्साहित रखना, समस्याओं का समाधान निकलना आप को लीडर बनाता है। असफलताओं व नकार को सीखने व अनुभव लेने की प्रक्रिया समझना व पैसे का धोखा खानें को सीखने की क़ीमत जानना आपको हमेशा सकारात्मक रखता है। यदि कोई विचार सम्पूर्ण प्रयास करने के बाद भी बाज़ार में सफल नहीं हो पा रहा है तो साहिर लुधियानवीं के गीत “ वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा“ याद करें व इस विचार को छोड़कर कुछ और करे।
हमारे देश में भगवान विष्णु का एक चित्र हर घर में होता है जिसमें वे क्षीर सागर में शेषनाग के उपर शांति से लेटे है तथा सर्प के हज़ार सिर उनके सिर के ऊपर है तथा लक्ष्मी पाँव दवा रहीं है। इसका अर्थ है कि जो स्टार्टअप का संस्थापक बाज़ार की उथल-पुथल में हज़ार समस्याओं में शांति से अपने काम को करना जारी रखेगा तो सफलता उसके कदम चूमेगी। एक स्टार्टअप संस्थापक को हरफ़नमौला बनाना पड़ता है। उसे यह गाना चाहिए- में ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया, हर फ़िक्र को धुवें में उड़ाता चला गया।”
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