Thursday, January 30, 2025

अथ उद्यमिता अनुशासन 3


अध्याय तीन 

उधम की सफलता का आधार 

             डॉ युवाल नोआ हरारी ने अपनी किताब 'सेपियन्स' में बताया है कि लगभग एक लाख साल पहले घरती पर मानव की कम से कम छः प्रजातियां बस्सती थीं, लेकिन आज सिर्फ होमो सेपियन्स ही बचे है। प्रभुत्व  की इस जंग में आखिर हमारी प्रजाति ने कैसे जीत हासिल की ? हमारे भोजन खोजी पूर्वज शहरों और साम्राज्यों की स्थापना के लिए क्यों एक जुट हुए?  कैसे हम ईश्वर, राष्ट्रों, और मानव अधिकारों में विश्वास करने लगे? कैसे हम दौलत, किताबॊ और क़ानून में भरॊसा करने लगे? और कैसे हमने नौकरशाही, समय-सारणी और उपभोक्तावादी संस्कृति को अपना लिया? इन सब सवालों का जवाब  है साझा विश्वास। कोई भी उद्यम तभी सफल व बड़ा बन सकता है जब उस संस्थान की टीम व उसके उप‌भोक्ता उम उद्यम की कहानी पर भरोसा करें। किस्से गढ़ जाते हैं। लेकिन किस्से गढ़ने आसान नहीं होते। फिर उन किस्सों पर लोगों का विश्वास क़ायम करना अधिक कठिन होता है। इसे कल्पित वास्तविकता कहते है। कम्पनियां - उद्यम इसी तरह स्थापित होती है। साझा विश्वास कम्पनियों की सफलता की वास्तविक ताकत बनती है। फिर छोटी कम्पनी बड़ी कम्पनियों को समाप्त कर देती है। ये सफल कंपनीय सामूहिक विश्वास को अधिक से अधिक लोगा में फैलाते है और काल्पनिक वास्तविकता का निर्माण करते हैं।

हम एक गहरी भ्रांति में जीते है-आशा की भ्रांति में। आदमी आत्म वंचनाओं के बिना जी नहीं सकता । नीत्से ने कहा है कि आदमी सत्य के साथ नहीं जी सकता है; उसे चाहिए सपने, भ्रान्तियाँ, और कई तरह के झूठ। मानव मन को गहराई से समझ कर ही आज कम्पनियों को सफल बनाया जा सकता है। न्यूरो मार्केटिंग, विपणन और तंत्रिका विज्ञान के मिश्रण से जुड़ा विज्ञान है। इसका मक़सद, उपभोगताओं के व्यवहार, भावनाओं और निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझना होता है। इस जानकारी का इस्तेमाल, विपणन रणनीतिया बनाने और बेहतर उत्पाद विकसित करने में किया जा रहा है। इस प्रकिया में आई ट्रैकिंग और आई गेजिंग, प्रभावी पैकेजिंग, रंग मनोविज्ञान, विज्ञापन द‌क्षता, निर्णय थकान, संतुष्टि का मूल्यांकन, हानि से बचना, एंकरिंग, गति और दक्षता तथा छपी हुई  प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जा रहा है। नीर ईयाल ने अपनी किताब हूक्ड में अनेक कम्पनियों जैसे फ़ेसबुक, पिंटरेस्ट , टूईटर,येलप,ब्लागिंग आदि कम्पनियों के उद्धरण दे कर हेविट, टिगर, एक्शन रिवार्ड के सिस्टम को बना कर कैसे कम्पनियों को सफल बनाया है। टिकटोक जैसी कम्पनियों छोटे छोटे व्हिडिओ बना कर करोड़ों लोगों को रोज़ व्हिडिओ बना कर डालने की आदत का गुलाम बना दिया है। आज करोड़ों लोग अपने जीवन के करोड़ों घन्टे रील देखने या सोशल मीडिया पर बिताते है। मोबाइल गेम निर्माता कम्पनियों गेम खेलने वाले लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देती है। 

हार्वर्ड विश्वविधालय के प्रो हेराल्ड जाटमैन कहते है कि मनुष्य का अवचेतन मन ही 95% खरीददारी के निर्णय करता है। 

स्वतंत्र इच्छा की अवधारणा पर डॉ युवाल नोआ हरारी कहते  है कि किसी व्यक्ति को विकल्प चुनने की स्वतंत्रता एक मिथ्या अवधारणा है। क्योंकि उपभोक्ता के व्यवहार पर तरह-तरह के प्रयोग व अध्ययन किए जा रहे है और अब कम्पनियाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं और यह कोशिश है कि उपभोक्ता के ख़रीदारी के निर्णय को कैसे प्रभावित किया जाय कि उसे पता भी चले कि कोई और उनके व्यवहार को प्रभावित कर उनकी इच्छा की स्वतंत्रता को प्रभावित कर रहा है। बाज़ार में ग्राहकों को मनाने के लिए ग्राहकों की बातें सुनना, सकारात्मक भाषा का उपयोग करना, ग्राहकों को विकल्प देना, उपहार देना, पीछे छूट जाने का डर दिखाना, आदि तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसलिए सभी इन्टरनेट आधारित कम्पनियाँ के पास हमारी इतनी अधिक जानकारी है और वह हमारे व्यवहार के सम्बन्ध में बिल्कुल सही सही गड़ना कर अनुमान लगाने में माहिर हो गई है कि अब केवल ख़रीदने के निर्णय प्रभावित किए जा रहे है बल्कि देशों के चुनावों को भी सफलतापूर्वक प्रभावित किया गया है। दरअसल, हाल ही में फेसबुक के फाउंडर और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने 'जो रोगन पॉडकास्ट' में शिरकत की थी। इस दौरान उन्होंने चुनावों पर एक विवादास्पद टिप्पणी की थी। मेटा के सीईओ ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत समेत दुनिया के कई देशों में चुनाव हुए और कई सरकार हारी हैं, जिसमें भारत भी शामिल है. उन्होंने कहा था कि ये हार दिखाती हैं कि महामारी के बाद लोगों का भरोसा कम हुआ है। इस टिप्पणी पर भारी विवाद चल रहा है। इन्टरनेट डाटा बेच कर कम्पनियाँ खरबों रूपये कमा रहीं है। आज बिना तकनीक का इस्तेमाल किये किसी भी बिज़नेस को सफल नहीं बनाया जा सकता है। आप किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी कोई पोस्ट या फ़ोटो अपलोड कर तत्काल आप को उससे संबंधित विज्ञापन दिखाने लगते है, ईमेल मैसेज आने लगते है। और तो और जब में अपने मोबाइल फ़ोन पर यह लेख टाईप कर रहा हूँ तो मेरा मोबाइल मेरा मन पड़ कर अगले शब्द का सजेशन दे रहा है। यदि में कोई शब्द टाइप करने में गलती करता है तो मोबाइल उस शब्द को लाल लाइन से दिखा देता है। यह सब इतनी तीव्रता से होता है कि मुझे लगता ही नहीं कि मेरे विचार मेरा मोबाइल कम्पनियाँ पड़ कर स्टोर कर रहीं है। तो आज आप को तकनीकी का जितना अधिक ज्ञान होगा और आप अपने बिज़नेस में जितना उपयोग करते है आप की सफलता की सम्भावना उतनी ज़्यादा है क्योंकि अब प्रतिस्पर्धा भौतिक जगत में हो कर वर्चुअल आभासी दुनिया में है। 


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