Thursday, January 30, 2025

अथ उद्यमिता अनुशासन 2


अध्याय दो

उद्यमिता क्या है?

तो जो लोग यह निश्चय कर लेते है कि उन्हें अपना स्टार्टअप कर उद्यमी बनना है तो हम वह सब जानना ज़रूरी है जो इस यात्रा में आने बाले पड़ाव है। 

उद्यमिता का मतलब है, किसी नए संगठन की शुरुआत करने की भावना। उद्यमिता में, कोई व्यक्ति किसी मौजूदा या भाविष्य के अवसर का पूर्वदर्शन करके, मुख्य रूप से कोई कारोबारी संगठन शुरू करता है। उद्यमिता में, एक तरफ जहां भरपूर मुनाफा कमाने की संभावना होती है, तो वहीं दूसरी तरफ़ जौखिम, अनिश्चितत‌ा और अन्य ख़तरों  की भी संभावन होती है। 


अच्छी बात यह है कि उद्यमी पैदा नही होते है बल्कि बनते है। तो यदि आप चाहे तो अपने मनोविज्ञान में बदलाव कर आप अपनी  प्रकृति को बदल सकते है । आज ऐसे अनेक सफ़ल फस्ट जनरेशन के व्यवसायी है जैसे सचिन बंसल, विजय शेखार शर्मा, फाल्गुनी नायर, आदेश अग्रवाल, दिपिन्द्रर गोयल, कुनाल शाह, रितेश अग्रवाल, नितिन कामत, कैवल्य बोरा, कैलाश कातकर, पी.सी मुशतफ़ा, नारायण मूर्ति, देवी सेट्टी आदि हमारे समय के ही उदाहरण है। यदि आप आत्म-अवलोकन करने के बाद पाते है कि शायद आपमें वह सब गुण नही है लेकिन आप फिर भी  उद्यमी बनने का निर्णय कर उन गुणों को विकसित करने की शुरुवात  करते है तो आप अपना व्यवसाय  शुरु कर सकते हैं।

उद्यमिता शुरु करने की बाधाएँ

मैं अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि यह रास्ता बहुत अकेला व अनिश्चितताओं से भरा होता है। स्टार्टअप शुरू करना बैसा तो बिलकुल नहीं होता जैसा प्रचारित किया जाता है। इस में आप अपने बॉस बिल्कुल नहीं होते यह यात्रा कहीं नौकरी करने के बिलकुल विपरीत होती है जहां चौबीस घंटे आप इसे जीते है। आप को उन बाधाओं से परिचित होना चाहिए ताकि आप यह मन बना सके कि इन बाधाओं का सामना आप को करना ही होगा। 


1. मनोवैज्ञानिक बाधाएँ - जो लोग ऐसे परिवारों से आते हैं जहां पहले से किसी तरह का व्यवसाय नही होता है उन व्यक्तियों को निन्म मनोवैज्ञानिक बाधाओं का सामना करना होता है-

  1. असफलता का डर - यह सबसे बड़ी मानसिक बाधाओं मे से एक है जिसका सामन हर  उद्यमी करता ही है। इसीलिए कहा जाता है कि “डर के आगे जीत है” यही भावना उद्यमी को निवेश, प्रतिष्ठा या वित्तीय स्थिरता का जोखिम उठाने की प्ररणा देती है। प्रत्येक असफलता को मूल्यवान सीख के अनुभव के रूप में देखना चाहिए।
  2. आत्म संदेह - कई उद्यमी निरंतर अपनी क्षमताओं पर संदेह अनुभव करते रहते है वह निरंतर अपने निर्णयों पर पुर्नविचार करते हैं। आत्म संदेह उद्यमी की सफलता के लिए एक प्रमुख बाधा बन सकता है। अतः उद्यमी को मेनटर, रोल माडल एवं एक नेटवर्क का सहारा लेना चाहिए। जहां वह अपने आत्म  संदेहों पर दूसरों की राय ले सकते है व दूसरों के अनुभवॊं से सीख कर आगे बड़ सकते है। 
  3. पूर्णतावादी होना- कोई भी उद्यम या उद्यमी पूर्ण नहीं होता है। यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया होती है। यदि आप  उद्यम के संबंध में बहुत ज्यादा विश्लेषण करते है तो शायद आप अपना व्यवसाय कभी शुरु ही न कर सके। जितनी कम दूरी पर नजर रख आप चलेगे उतनी अधिक दूरी आप  तै कर सकते हैं। समय के साथ प्रगति करने और अपने काम को निखारने पर ध्यान होना चाहिए व निरंतर प्रयास व सुधार करते रहने पर ही  समय के साथ-साथ पूर्णता आती है। कोई भी जीवित व्याप्ति पूर्ण नही होता केवल मृत व्यक्ति ही पूर्णता को प्राप्त होता है।
  4. अस्वीकृति का डर - कोई भी उद्यम एक परिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होता है, जहां बहुत सारे लोग भागीदार होते है। किसी भी उद्यमी को ग्राहकों, निदेशकों व भागीदारों से निरंतर संवाद करना होता है जहां अस्वीकृति ही अधिकांश समय आपको मिलतीं है। अत: अस्वीकृति का डर उद्यमी को मन से निकालना ही होता है। क्योंकि विश्व का कोई भी उद्यमी यह नही कह सकता कि उन्होने अस्वीकृतियों का सामन नही किया है। उद्यमी को 99% अस्वीकृत होने के लिए मानसिक रूप से तैयारी रखनी चाहिए। हेनरी फोर्ड फोर्ड मोटर कंपनी बनाने के पहले दिवालिया हो गये थे। जे.के. रोलिंग्स का उपन्साय हेरी पॉटर कितने सारे प्रकाशकों द्वारा  अस्वीकृत  किया गया था। स्टीव जाँव को उनकी है कंपनी से निकल दिया गया। जेक मॉ को हरवार्ड विजनिस स्कूल द्वारा 10 बार  अस्वीकृत किया गया तथा 30 से ज़्यादा नौकरियों के लिए रिजेक्ट किया गया। अस्वीकृति उद्यमी की यात्रा का अनिवार्य हिस्सा है तथा प्रत्येक अस्वीकृति ही सफ‌ल उद्यमी को सही चुनाव का अवसर देती है 
  5. इम्पोस्टर सिंड्रोम - यह वह भावान है जहां उद्यमी को लगता है कि वह सफलता के लायक नही है और उन्हें सफलता धोखे से मिली है। यह भाव निरंतर उद्यमी को मानसिक बाधा के तोर पर परेशान करता है। एक अध्ययन के अनुसार भारत  के 31% उद्यमी इम्पोस्टर सिंड्रोम से प्रभावित है। अपने हुनर को नकारना इम्पोस्टर सिन्ड्रोम का प्रमुख लक्षण है। फेसबुक की पूर्व सीईओ शेरिल सैडवर्ग ने कहा था की हार्रवर्ड यूनिवर्सिटी में उन्हें हर परीक्षा के बाद लगता था कि उनका टेस्ट खराब हुआ है  व उन्हें अच्छे नम्बर संयोगवश मिले है। मिशेल ओबामा, स्टारबक्स के सी.ई.ओ हॉवर्ड शुल्ज भी इस भावना से पीड़िता रहें है। इस समस्या से आपका आत्मविश्वास डिग जाता है। अतः अपनी कबलियत पह‌चाने व अपने आप को सफलता का श्रेय देना सीखे।
  6. फोकस ही कमी - उद्यमियों के दिमाग में हमेशा बहुत सारे विचार और सामने बहुत सारे काम चलते रहते हैं जो उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहते है। इस बाधा को दूर करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, प्राथमिकताएँ, व समय प्रबंधन आवश्यक होता है। एक स्टेज के बाद उद्यमी को अपने काम का बँटवारा कर टीम के सदस्यों को वह सभी काम सौंप देना चाहिए जो वे स्वतंत्र रूप से अधिक कुशलता से कर सकते है। 
  7. अकेलापन - उद्यमी को अपना रास्ता ख़ुद बनाना पड़ता है। वे खग का दृष्टिकोण व ख़ुद की शर्तें बनाते है। इसलिए उद्यमी अक्सर अपने आप को अकेला पाता है। जब आप अपनी टीम के साथ होते है तो आप को लगता है कि आप की रेंक के कारण आपको बहिष्कृत कर दिया गया है। अकेलापन आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। 
  8. अज्ञात का डर - जब उद्यमी अपने लक्ष्य निर्धारित करता है तो उन लक्ष्यों तक पहुँचने के अनेक रास्ते हो सकते है। इन बहुत से अनजान रास्तों में से एक का चुनाव करना हमेशा डरावना होता है। क्योंकि आप का एक ग़लत चुनाव पूरे बिज़नेस या पूरी टीम के भविष्य को दांव पर लगा सकता है। अज्ञात के भय से उबरकर ही उद्यमी सफल हो सकता है। 

2.पारिवारिक बाधाएँ - नया व्यवसाय शुरू करना हमेशा रोमांटिक, रोमांचक व चुनौती पूर्ण होता है। इसलिए जिन परिवारों में पूर्व से व्यवसाय नहीं हो रहा होता है वे परिवार नौकरी जैसा सुरक्षित कैरियर की सलाह देते है तथा जिन परिवारों में पूर्व से व्यवसाय हो रहा है वे परम्परागत व्यवसाय को करने की सलाह देते है। जबकि शुरू में उद्यमी को सफलता के लिए परिवार का समर्थन आवश्यक होता है अन्यथा उसे अंदर व बाहर दोनों जगह संघर्ष करना पड़ता है। यदि परिवार समर्थन करता है तो उद्यमी को अनेक लाभ होते है। 

  1. तनाव कम होना- उद्यमी हमेशा तरह-तरह के तनावों से निरंतर जूझते रहते है। हालाँकि सफल होने के लिए तनाव एक आवश्यक कारक है। लेकिन लम्बे समय तक अधिक तनाव के कारण मस्तिष्क की प्रतिक्रिया प्रणाली शरीर में कार्टीशोल व एंडरनल हार्मोन्स का स्राव करती है जिससे स्पष्ट सोच व निर्णय लेने की क्षमता, जोखिम उठाने की क्षमता व उत्पादकता प्रभावित होती है। उद्यमी अवसाद ग्रस्त हो जाते है। यदि यह तनाव लम्बे समय तक चलता है तो उच्च रक्तचाप, ह्रदयघात, मांसपेशियों की समस्या या डायबटीज़ जैसी परेशानियाँ बड़ जाती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। हार्मोनल असंतुलन के कारण अनेक प्रकार की समस्याएँ हो सकती है। एक उद्यमी ने हाल ही में अपने व्हटएप से  अपने सभी ग्रुपस में “आल आफ गुडनाइट अण्ड स्वीट ड्रीम्स” का सन्देश भेज कर आत्महत्या कर ली तो दूसरे उद्यमी ने दस पेजों का सुसाइड नोट लिखा जिसमें उन्होंने फ़ैक्ट्री लगाने से सुसाइड की स्थिति तक पहुँचने की दास्तान लिखी कि किसने सहायता की, किसने धोखा दिया, किसने भुगतान नहीं किया, कौन परेशान कर रहा था, शासन के किसी विभाग से कोई मदद नहीं मिली आदि। हालाँकि मीडिया या सोसल मीडिया पर इस तरह की घटनाओं की ज़्यादा चर्चा नहीं होती है। इन स्थितियों से उद्यमी को अकेले ही लड़ना पड़ता है। लेकिन जब कैफ़े काफ़ी डे के मालिक ने आत्महत्या की तो देश में खूब चर्चा हुई। एक अध्ययन के अनुसार हमारे देश में 49% उद्यमी तनाव से ग्रस्त पाए गए हैं। तो ऐसे में परिवार का साथ होता है तो उद्यमी संघर्ष कर सफल हो जाता है। 
  2. लचीलापन बड़ता है- लचीलापन असफलताओं से उबरने में मदद करता है। लचीलापन उद्यमी का बहुत बड़ा गुण है। 
  3. भावनाओं पर नियंत्रण- उद्यमी को भावनाओं के अतिरेक से हमेशा बचना चाहिए। श्री कृष्ण ने गीता के अध्याय 2 के श्लोक 38 में कहा है “सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौअर्थात् उद्यमी को  सुखदुःखको समतुल्य समझकर उनमें  रागद्वेष करके तथा लाभहानिको और जयपराजयको समान समझकर काम करना चाहिए। इसलिए परिवार उद्यमी को एक सुरक्षित स्थान दे सकता है। 

3. क़ानूनी बाधाएँ - कोई नया उद्यम शुरू करना आसान काम नहीं होता है। हमारे देश में उद्यम को शुरू करने के लिए इतने अधिक विभागों से लाइसेंस व अनुमतियाँ लेनी होती है जो किसी नये उद्यमी के लिए बहुत मुश्किल होता है। विश्व बैंक समूह द्वारा जारी ईज आफ डूईग बिज़नेस- कारोबार सुगमता रेंकिग प्रणाली के तहत वर्ष 2019 में भारत को 190 देशों में 63 वाँ स्थान मिला था। इस रेंकिग में न्यूज़ीलैंड पहले, सिंगापुर दूसरे तथा डेनमार्क तीसरे स्थान पर रहे। हालाँकि भारत ने इस मामले में अनेक कदम उठाए हैं तथा वर्ष 2023-24 का बजट पेश करते समय वित्त मंत्री ने इस सूचकांन में रैकिंग सुधारने की सरकार की प्रतिवद्धता दुहराई है। फिर भी उद्यम शुरू करने  के पूर्व बिज़नेस लाइसेंस विभिन्न प्रकार के रजिस्ट्रेशन, सुरक्षा परमिट, एसटी रजिस्ट्रेशन, एम एस एम ई रजिस्ट्रेशन व स्टार्टअप इण्डिया रजिस्ट्रेशन आवश्यक है। हलाकि कोई भी नया उद्यम कानून के दायरें में ही शुरू हो सकता है लेकिन विग़त वर्षी मैं विश्व भर में ऐसे स्टार्टअप शुरु किये गये जो किसी क़ानून के दायरे में नहीं आते थे जेसै यूवर के पास एक भी टैक्सी नही है, एयर बी एन बी के पास एक भी कमरा नही है, जमेटो के पास एक भी रेस्टोरेन्ट  नही है आदि । नये उद्यमी मागते है कि शासन से परमीशन मांगने के बजाय छमा मांगना ज्यादा आसान होता है। इसी रणनीति पर बहुत से उद्यम प्रारंभ हो सकें है। लेकिन जो लोग पर‌मापरगत उद्यम करना चाह‌ते है उनके सामने कानूनी बाधाएँ  हमेशा रहेगी जिन को पार करना कठिन, श्रमसाध्य, खर्चीला व अत्याधिक समय लेने वाला है, लेकिन विभिन्न   राज्यों की सरकारों ने सिंगल विंडो सिस्टम लगा कर इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश निरंतर जारी है।  अब राज्य सरकारों  के बीच में निवेश को आकृषित करने, रोज़गार के अवसर उत्पन करने, व राज्य की आय बढ़ाने लिए निजी उद्यमियों को तरह तरह की सुविधाए देने की होड़ लगी है। भारत में हमेशा से हो व्यवसाय को बहुत अच्छी नजर से नही देखा गया लेकिन पहलीबार भारत के प्रधामांत्री ने स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इण्डिया जैसे कार्यक्रम शुरू का उद्यमियों के प्रति समाज व परिवार में एक सकारात्मक छवि बनाने का प्रयाय  किया है। इन कारण आज युवाओं में नोकरी करने के स्थान पर अपना व्यवसाय शुरू की समझ बड़ती जा रही है तथा भारत में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको सिस्टम पिछले 9 वर्षों में खड़ा हुआ है। 

4 . व्यवसाविक  बाधाएँ- नये उद्यमी को अपना कारोबार शुरु करने के लिए पूर्व से स्थापित औद्योगिक घरानों, बहु राष्ट्रीय कम्पनियों, व व्यापारिक संस्थानों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। बाजार में स्थापित कंपनीय तरह तरह की बाधाएँ व समस्या उत्पन्न करती है। जिस से नई कम्पनियां या तो प्रतिष्पर्धा से बाहर चली जाये या बड़ी कम्पनियॊं में विलय कर लें या बंद हो जाय। हमारे देश में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का नेटवर्क बहुत प्रभावी होने के कारण अधिकांश सेक्टरों में बड़ी कम्पनियों  का एकाधिकार है। किसी कारोबार को शुरु करना उतना  मुश्किल नहीं है, जितना मुशिकल है उसे आसानी से आग़े बढ़ाते रहना । व्यापार मैं प्रतिस्पर्धा हमेशा अच्छी होती है तथा उपभोक्ताओं के हित मे होती है लेकिन जब असमान संगठनॊं वाली कंपनियॊं के बीच स्पर्धा हो तो मुश्किल होता है। यदि कोई उद्यमी सोचता है कि उसका कोई प्रतिद्वंदी नही है और वह दौड़ में अकेला है, तो यह उसकी सबके बड़ी भूल है।  व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा जीतने  के लिए आवश्यक है खुद पर भरोसा रखे, प्रतियोगी से बेहतर आईडिया ले कर आप प्रोडक्ट की समझ रखें, ग्राहक को भगवान माने, फाईनेंस पर नज़र रखे, टीम की कद्र  करें फीडबैक लें  व दें, मार्केटिंग की नवीनतम तकनीकी को अपनाऐं तथा हमेशा बदलाव के लिए तैयार रहें। यदि आप शुरुआत  कर रहे है तो आप को बहुत कम संसाधनों  के साथ कार्य शुरू करना है इसलिए आप कभी भी अपने प्रतिभागी का मॉडल अपना कर प्रतियोगिता नही जीत सकते। आप को अपने प्रतिभागी से अलग बिज़नस मॉडल तैयार करना होगा  तथा उन कामों को चिहित करना होगा जो बाजार की मांग है व उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएँ देने के लिए आवश्यक है। उन  कार्यों को आप को अपने बिज़नस मॉडल शमिल करना होगा बाज़ार में जो बड़ी कंपनीय है उनकी मुश्किल यह है कि वह आसनी से बदलाव को लागू नही कर पती है जब कि नई व छोटी कंपनियों मे इतना अधिक लचीलापन होता कि वह कभी भी बदलाव के लिए तैयार रहती है और यह ताक़त उन्हें जीतने में मदद करती है। सन् 1980 के दौरान कोल वार कोला विरुद्ध पीप्सी, मैकडोनाल्ड विरुद्ध बरगर किंग, फोर्ड विरूद्ध जनरल मोटर, डॉकन डोनेट विरुद्ध स्टारबक्स, नाइकी विरुद्ध रीवोक आदि ऐसी ही लड़ाईया है जो व्यापारिक जगत में प्रसिद्ध है। कोलगेट, पोप्सीडेंट तथा दंत कांती, मैगी और पतंजलि आटा नूडल, पारले व ब्रिटानिया, आदि की जँग अभी जारी है। नये स्टार्टअप में पेटीएम, ओला उबर , योयो, एयर वी एन वी, ज़ेप्टो, ब्लिंकिट , बिगबास्केट आदि की प्रतियोगिताएँ इसी तरह की है। आज इन्टरनेट आधारित 

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